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नक्सलियों से मुठभेड़ में CRPF के 12 कमांडो शहीद, चार नक्सली भी ढेर

पटना। गया और औरंगाबाद सीमा से सटे मदनपुर थाना क्षेत्र स्थित सोनदाहा जंगल में डुमरी नाला के पास भाकपा माओवादी नक्सलियों द्वारा किए गए सीरियल आइईडी विस्फोट में सीआरपीएफ कोबरा के बारह जवान शहीद हो गए। मुठभेड़ में चार नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। नक्सलियों के इस हमले में छह जवान गंभीर रूप से घायल थे जिसमें से तीन जवानों ने इलाज के दौरान अभी कुछ देर पहले दम तोड़ दिया। हमले में घायल जवानों का इलाज जारी है, कुछ और जवानों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। शहीद जवानों की संख्या बढ सकती है। घटनास्थल पर अभी भी पटना प्रक्षेत्र के आईजी नैयर हसनैन खान और आइजी अभियान कुंदन कृष्णन कैंप कर रहे हैं।

चिकित्सकीय सुविधा में हुई देरी

खराब मौसम के कारण जंगल में फंसे घायल जवानों को 10 घंटे तक चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी। हेलीकॉप्टर जंगल भेजा गया, लेकिन बारिश के कारण उतर नहीं सका। गया से एंबुलेंस रवाना की गई।

विस्फोटों के बाद देर रात तक पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चली। दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग होती रही।

सर्च ऑपरेशन को निकले थे जवान

औरंगाबाद एसपी बाबूराम के नेतृत्व में नक्सलियों के खिलाफ पहड़तली इलाके में सर्च आपरेशन चल रहा है। बड़ी संख्या में सीआरपीएफ व कोबरा के जवान अभियान में लगे हैं। 205 बटालियन कोबरा के जवान सर्च आपरेशन चला रहे थे। आपरेशन के दौरान सभी डुमरी नाला से गुजर रहे थे तभी नक्सलियों ने सड़क में लगाए आइईडी बम को तार के सहारे विस्फोट कर दिया गया। नक्सलियों ने 25-30 विस्फोट किए।

सर्च करने गये पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। इस लैंड माइन विस्फोट में कोबरा बटालियन के 10 कमांडो शहीद हो गये।

घटना सोमवार की देर रात की है। इसके पहले मुठभेड़ में जवानों ने चार से अधिक नक्सलियों को भी मार गिराया और कुछ घायल भी हुए थे। आशंका है कि घायलों को लेकर नक्सली जंगल में चले गए । चार नक्सलियों के शवों के साथ ही मुठभेड़ स्थल से अत्याधुनिक हथियार भी बरामद हुए हैं।

एडीजी हेडक्वार्टर सुनील कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मुठभेड़ में दस जवान शहीद हुए हैं और चार नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। इस हमले में छह से अधिक जवान घायल हुए हैं। इनमें से तीन जवानोें को मगध मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य को पटना के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नक्सलियों द्वारा आईडी विस्फोट की यह बड़ी वारदात है। उ्न्होंने कहा कि नक्सलियों के मंसूबों को नाकामयाब किया जाएगा।

घटनाक्रम

एक हफ्ते पहले ही नक्सलियों ने औरंगाबाद एसपी बाबूराम को जान से मारने की धमकी दी थी। सोमवार दोपहर नक्सलियों की घेराबंदी के लिए सीआरपीएफ की एलिट कमांडो फोर्स कोबरा के जवान सोनदाहा पहुंचने वाले थे कि नक्सलियों को इसकी भनक लग गई और उन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया।

पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। दोनों ओर से 500 राउंड से ज्यादा गोलियां चलीं। इस दौरान डुमरी के पास पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने लैंडमाइंस विस्फोट कर दिया जिसमें आठ जवान शहीद हो गए।

मूसलधार बारिश और अंधेरा होने से जवानों को काफी मुश्किलें हो रही थीं। लेकिन जवानों ने हौसले बनाए रखते हुए नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। सोमवार दोपहर 2 बजे शुरू हुई मुठभेड़ रुक-रुक कर देर रात 1.00 बजे तक जारी थी।

नक्सली बड़ी वारदात को देने वाले थे अंजाम

पुलिस के मुताबिक लगातार मात खा रहे नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए सोमवार को जंगल में जमा हुए थे। नक्सलियों के जत्थे में पोलित ब्यूरो मेंबर संदीप यादव, जोनल कमांडर नवल भुइयां, रामप्रसाद यादव, अभय यादव, अभिजीत यादव शामिल थे। नक्सलियों के जुटने की इंटेलिजेंस इनपुट मिलते ही औरंगाबाद पुलिस, कोबरा 205 तथा सीआरपीएफ के सैकड़ों जवान पहाड़ियों की ओर चले गए।

जंगल में कोबरा के 60 जवानों के फंसे होने की आशंका

50 से 60 जवान अभी भी जंगल में फंसे हैं। देर रात तक पुलिस और नक्सलियों के बीच गोलीबारी चल रही थी।

सीआरपीएफ के डीआईजी कमल किशोर के मुताबिक, नक्सलियों के पास से भारी तादाद में एडवांस्ड वेपन्स और कारतूस मिले हैं। बारिश और अंधेरे की वजह से सीआरपीएफ जवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जख्मी जवानों को लाया गया पटना

तीन घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से देर रात पटना लाया गया। दो जवानों को गया के एएनएमएमसीएच में भी भर्ती कराया गया है। घायल जवानों को लाने के लिए मौके पर लैंड कर रहे हेलिकॉप्टर को नक्सलियों ने निशाना बनाकर गिराने की कोशिश की।

गया और औरंगाबाद में हाई अलर्ट

मगध जोन के डीआईजी सौरभ कुमार ने मुठभेड़ के बाद गया और औरंगाबाद के सभी थानों को अलर्ट किया है। डीआईजी ने बताया कि सीआरपीएफ-कोबरा के आॅपरेशन को तेज किया गया है। सूत्रों के मुताबिक माओवादियों का दस्ता गया और औरंगाबाद के जंगली इलाकों में अब भी मौजूद है।