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वन विभाग की मिलीभगत से जंगल की जमीन पर 23 अवैध दुकाने बनाकर कब्जा करने का पर्दाफाश

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फर्जीवाड़ें फर्जीवाड़ा कर अवैध भवनों में बड़ौदा राजस्थान ग्रामीण बैंक सहित अन्य व्यवसायों का संचालन, बांसवाड़ा जिले का सबसे बड़ा खुलासा

शरद पंड्या की रिपोर्ट

बांसवाडा। आप पाठक गण सब जानते हैं कि अंदर की समाचार पत्र सबसे समाचार पत्रों से अलग हटकर निडर होकर अंदर की खबर पाठकों तक पहुंचाता आया है। इसी क्रम में बांसवाड़ा जिले का सबसे बड़ा फर्जीवाड़े की खबर अंदर की खबर को मिली जिस पर काम शुरू किया गया तो चौकाने वाले तथ्य मिलते गए। पूरा मामला बांसवाड़ा-परतापुर मार्ग पर वजवाना गांव के बस स्टैण्ड का है। इस मुख्य मार्ग पर कुछ वर्षों पूर्व कुछ नहीं था…बस इक्का दुक्का सरकारी भवन बने हुए थे। परंतु जैसे ही वजवाना गांव के निकट कोरामंडल इंडिया सीमेंट की फैक्ट्री लगी और इस वजवाना गांव में वाहनों के साथ आम जन का आवागमन बढऩे लगा तो तथाकथित भू माफियाओं ने फर्जीवाड़ा कर एक के बाद एक वन विभाग की जमीन पर दुकाने बनाकर अवैध अतिक्रमण का गौरखधंधा शुरू कर दिया। जो आज तक निरंतर जारी है।

बांसवाड़ा-परतापुर मार्ग पर स्थित वाजवाना गांव के बस स्टैण्ड पर एक के बाद एक लगभग 23 अवैध दुकानों का निर्माण हो गया। यह सारी दुकानें एक रात में तो नहीं बनी होगी। कुछ समय तो लगा होगा। लेकिन वन विभाग चुपचाप आंखें मूंद कर बैठा रहा। इससे यह कहा जा सकता है कि बिना मिली भगत से संभव नहीं है।

वन विभाग की मिलीभगत का पुख्ता प्रमाण यह है कि उक्त अवैध दुकानों को कभी तोडऩे की कार्रवाई तो दूर नोटिस तक नहीं दिया गया। महज खानापूर्ति कर एवं अतिक्रमियों को लाभ पहुंचाने के लिए उल्टा वन विभाग के अधिकारियों ने वन विभाग के रिकॉर्ड में अतिक्रमण करने वालों का नाम दर्ज कर लिया। वन विभाग की इससे बड़ी करतूत को भी हमने पकड़ा। वन विभाग ने अतिक्रमियों के नाम के आगे अतिक्रमण करने वाले ने किस लिए अतिक्रमण किया है। यह भी दर्ज किया है। उसमें भी फर्जीवाड़ा किया गया है। सभी अतिक्रमियों के नाम के आगे कृषि एवं आवास हेतु अतिक्रमण दर्ज किया गया है। जबकि उक्त सभी जगहों पर बैंक सहित आम व्यवसायिक कार्य हो रहे हैं। जिसका पुख्ता प्रमाण ऊपर फोटो में दिख रहा है। फिर भी वन विभाग मौन है। अंदर की खबर ने वन विभाग से इतने सारे अतिक्रमियों के विरूद्ध कार्रवाई का ब्यौरा मांगा किया तो चौकाने वाला लिखित में जवाब दिया गया है कि उक्त अतिक्रमियों के विरूद्ध कार्रवाई का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि कैसी मिली भगत है। जबकि अतिक्रमियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी जो नहीं हुई। बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े फर्जीवाडे की फेहरिस्त पड़ी है। किसने कीतनी जमीन पर अवैध निर्माण किया….।

बैंक अधिकारियों की मिलीभगत…..

अतिक्रमियों और बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिकारियों की मिलीभगत का नमूना देखिए कोई भी बैंक किराये पर भवन लेने से पूर्व भवन से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करवाता है। उक्त बैंक जिस भवन में संचालित हो रही है। उस भवन के मालिक का नाम है इंद्रजीतसिंह पुत्र सूर्यसिंह झाला निवासी झालों का गढ़ा। बड़ौदा राजस्थान बैंक शाखा वजवाना जिस स्थान पर संचालित है। वह खसरा नंबर 1587 वन विभाग की जमीन है। उक्त जमीन को बैंक ने कौन से दस्तावेजों के आधार पर किराया लिया यह भी एक जांच का विषय है। इसमें भी एक बड़ा फर्जीवाड़ा होना तय है।