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पुलिस का सफेद झूठ, कुछ तो शर्म करो पुलिस, क्‍यूं अपराधियों को बचाने पर तुली है पुलिस

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उदयपुर। पुलिस विभाग इतना झूठा है कि अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। झूठ भी ऐसा कि जिसके सिर-पैर ही नहीं है। …और ऐसे ही झूठ के कारण अपराधी अपने वकीलों के जरिये कोर्ट बड़े आराम से छूट जाते हैं। आखिर पुलिस को झूठ बोलना क्यों पड़ता है? क्यों नहीं पुलिस सच को आधार बनाकर अपराधियों को कोर्ट में पेश करती है। ऐसी ही कई झूठी कहानियां उजागर हो चुकी है, लेकिन यह कहानी ऐसी है कि कोई भी व्यक्ति हैरान होकर माथा पकड़ लें। आज पुलिस विभाग द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता से ये झूठ उजागर हुआ है। आज दो कहानियां पेश है। एक पुलिस की और दूसरी असली, जो पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है। और इसके सारे प्रमाण हमारे पास मौजूद है।

पुलिस की कहानी : डकैती की योजना बनाते पांच गिरफ्तार 

आज तड़के अंबामाता थानाधिकारी राजेंद्र जैन को सूचना मिली कि लाल मगरी में एक आधे-अधूरे निर्माणाधीन मकान के अंदर बैठकर करीब पांच-छह बदमाश डकैती की योजना बना रहे हैं, जिनके पास हथियार भी है। इस पर तुरंत एएसपी सुधीर जोशी के निर्देेशन में थानाधिकारी राजेंद्र जैन, कांस्टेबल राजेंद्रसिंह, अर्जुनसिंह, राकेश, भीमराज व रणजीतसिंह एवं स्पेशल टॉक्स फोर्स प्रभारी लीलाधर मालवीया, कांस्टेबल योगेश, गणेशसिंह, प्रहलाद, यशपाल, सलीम ने टोह लेकर दबिश दी। अपराधी वहां से भागने लगे। पुलिस ने घेरा डाला और पांच बदमाशों को पकड़ लिया। गिरफ्तार बदमाशों में गरीब नवाज कॉलोनी, अंबामाता निवासी जावेद खान पुत्र सलीम खान, बापनाओं की गली, मोती चौहट्टा निवासी पुनीत कोठारी पुत्र सतीश कोठारी, कुंजनवाड़ी निवासी असलम उर्फ दांतला उर्फ मामा, चौखला बाजार, धानमंडी निवासी मोहम्मद यूनुस उर्फ लंगड़ा, कालाजी गोराजी, सूरजपोल निवासी राजेश कोठारी पुत्र शिवराज कोठारी शामिल है। इन बदमाशों से एक कार, देसी कट्टा सहित अन्य हथियार बरामद होना बताया गया।

असली कहानी : मुंबई से गिरफ्तार करके लाए बदमाश

इस कहानी की शुरुआत अंबामाता थाने में दर्ज प्रकरण संख्या ६९/१६ से होती है। इस मामले में पुनीत कोठारी के मोबाइल से असलम मामा ने मुंबई से एक व्यापारी से ५० लाख की फिरौती मांगी थी। पुलिस ने पुनीत के मोबाइल कॉल रिकार्ड के आधार पर उसके दोस्त राजेश कोठारी को हिरासत में लिया और पूछाताछ की, तो सामने आया कि यह काम आजम के इशारे पर मुंबई से हो रहा है। इस कहानी की शुरुआत यहां से होती है कि इकबाल वाइपर का भाई असलम मामा, पुनीत कोठारी, इमरान कुंजड़े का भाई अशफाक, तीनों प्रोपर्टी और फिरौती वसूलने का काम साथ में करते थे। अशफाक ने असलम और पुनीत कोठारी को धमकाया कि क्रक्रतुम मेरे भाई का नाम लेकर कारोबार कर रहे हो। इसलिए मेरा हिस्सा ज्यादा होना चाहिए।ञ्जञ्ज लेकिन असलम और पुनीत इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ। इससे अशफाक, असलम और पुनीत का दुश्मन हो गया। उन्हें लगातार धमकाने लगा।

नवंबर, २०१५ में इसी बात को लेकर असलम और इकबाल वाइपर के घर कुंजरवाड़ी में अशफाक ने उसके साथियों से मिलकर तोडफ़ोड़ की। असलम आजम का बचपन का दोस्त है। असलम और आजम ने मिलकर अहमदाबाद में एक प्लान बनाया। इन्होंने इंदौर के सलीम शूटर को हायर किया और दस लाख रुपए में इमरान और उसके भाई अशफाक, आदिल और मोहम्मद हुसैन चारों सुपारी दे दी। ये सारा प्लान बनाकर उदयपुर में सलीम शूटर को भेजा। यहां सलीम ने जावेद दांताला और यूनुस लंगड़ा के जरिये चारों भाइयों की रैकी शुरू कर दी। फरवरी माह में मोहम्मद हुसैन पर फायर किया था, जिससे वह जख्मी हो गया। इस मामले में यूनूस और जावेद दांतला को गिरफ्तार किया था । इधर, असलम अहमदाबाद में आजम के पास भाग गया, जहां से दोनों मुंंबई चले गए। इन दोनों ने सलीम शूटर को मुंबई बुलाया, जहां सलीम को काम पूरा नहीं होने पर एक लाख रुपए देकर वापस भेज दिया। मुंबई में असलम के पास रुपया खत्म हो गया, तो उसने पुनीत कोठारी से रुपया मांगा। रुपया लेकर पुनीत कोठारी मुंबई चला गया।

इधर, फायरिंग मामले में जमानत मिलने पर जावेद और युनूस भी मुंंबई चले गए। वहां जब चारों के पास रुपया खत्म हो गया, तो आजम के निर्देशन में फिरौती का प्लान बनाया और अंबामाता के व्यापारी से ५० लाख की फिरौती मांगी गई। यह फिरौती पुनीत कोठारी के मोबाइल से मांगी गई। पुनीत का मोबाइल कॉल रिकार्ड एक अहम सुराग का काम कर गया। इस पर पुलिस ने पुनीत के दोस्त राजेश कोठारी को उसके दो दोस्तों के साथ उठाया। इसके बाद अंबामाता थानाधिकारी राजेंद्र जैन अपनी टीम के साथ फ्लाइट से मुंंबई गए, जहां से बीते शनिवार को पुनीत, जावेद सहित चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लाया गया। हां, इस कहानी में मजेदार बात ये है कि सभी नौ पुलिसकर्मी राजेश कोठारी व उसके दोस्तों के खर्चे पर मुंंबई की हवाई यात्रा कर आए। साथ ही एक रोचक बात और ये हैं कि इन पुलिस कर्मियों ने अपनी मुंबई यात्रा के फोटो फेसबुक पर अपलोड किए। इस कहानी की सच्चाई का पता इन पुलिसकर्मियों की मोबाइल लोकेशन, फ्लाइट टिकट और इनके फेसबुक अकाउंट से लगाया जा सकता है।