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न्यू लुक स्कूल की प्रिसिंपल लता कोठारी के द्वारा करोड़ों का काला धन जमा करने का पर्दाफाश

9 हजार की नोकरी से शुरूआत करने वाली प्रिंसिपल के पास 9 करोड़ से अधिक की संपत्ति
प्रिंसिपल के पद पर रहकर स्कूल को करोड़ों का लगाया चुना
क्या मामला बनता है : काला धन जमा कर आय से अधिक संपत्ति जमा करने का मामला दर्ज हो सकता है !
स्कूल की राशि का गबन करने का अरोप प्रमाणित होने पर सरकार स्कूल पर रिसिवर नियुक्त कर सकती है

(शरद पंड्या की विशेष रिपोर्ट)

बांसवाड़ा। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने काले धन वालें के विरूद्ध शुरू किए गए अभियान में अंदर की खबर ने भी योगदान देने का निर्णय लिए है। इसी क्रम में हमने जांच पड़ताल शुरू की तो न्यु लूक सैकण्डरी स्कूल लोधा की प्रिंसिपल लता कोठारी द्वारा बड़े पैमाने पर काला धन जमा करने की खबरे हमें मिलने लगी। इसकी गहनता से जांच की गई तो चौकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। वर्ष 1979 में श्रीमती लता कोठारी ने बतौर न्यु लूक स्कूल की प्रिंसिपल की नियुक्ति के साथ ही प्रतिमाह लगभग 9 हजार रूपए के वेतन के साथ अपने जीवन की शुरूआत करने के दस्तावेज अंदर की खबर के पास मौजूद हैं।

अंदर की खबर को मिले दस्तावेजों के अनुरूप लता कोठारी के पास लगभग 9 करोड़ की संपत्ति होना दर्शा रहा है। अब यहां चौकाने वाली बात यह है कि एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल जिसका प्रथम वेतन 9 हजार रूपए हो और अन्य कोई व्यवसाय भी नहीं है। इस बात को स्वयं स्कूल के प्रबंधक प्रदीप कोठारी ने स्वीकार किया है कि उनकी पत्नी अन्य कोई भी अन्य व्यवसाय नहीं करती है। उस महिला के पास 9 करोड़ की संपत्ति कहां से कैसे आ गई। इसकी भी जांच शुरू की गई। जिस स्कूल की वह प्रिंसिपल है उसी स्कूल के प्रबंधक उनके पति प्रदीप कोठारी हैं इसे कहते हैं …..सैय्या भये कोतवाल तो डर काहे का…। हां यह कहावत पूरी तरह से लता कोठारी पर चरितार्थ हो रही है। पूरा मामला यह है कि कोई भी निजी विद्यालय पंजीकृत सोसायटी के माध्यम से संचालित होती है। न्यू लुक सैकण्डरी स्कूल भी सोसायटी के माध्यम से संचालित है। जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 336 वर्ष 1979 है।

इस तरह सोसायटी के माध्यम से चलने वाला न्यु लूक स्कूल कानूनन रूप से इसका कोई मालिक नहीं है। उक्त स्कूल का संचालन लाभ नहीं कमा कर समाज सेवा के उद्देश्य से संचालित होता है। परंतु न्यु लूक स्कूल के कर्ताधर्ताओं ने इसे अपनी दुकान समझकर जब चाहा जैसा चाहा संस्था के साथ पूरा कोठारी परिवार मनमर्जी से खिलवाड़ करता रहा। सोसायटी एक्ट एवं सीबीएसई के नियमों के अनुसार फीस के रूप में ली जाने वाली राशि अगर बड़ी मात्रा में संस्था के पास खर्चों के बाद बच जाती है तो एक अधिकतम सीमा तक तो रिजर्व फंड में रखनी होती है और उससे अधिक होने पर अगले वर्ष की फीस में बढ़ोतरी नहीं कर अभिभावकों को इसका लाभ पहुंचाना चाहिए। परंतु कोठारी परिवार ने इसे अपनी घर की दुकान समझकर स्कूल में बचे हुए रूपयों का दुरूपयोग धडल्ले से किया, जिसके प्रमाण अंदर की खबर के पास है। इन्हीं रूपयों से लता कोठारी ने बड़े पैमाने पर जमीनें भ ी खरीदी जिसके भी प्रमाण हमारे पास हैं।

स्कूल को चूना लगाने का सबसे बड़ा सबूत देखिए खसरा नंबर 608/236 3 बीघा 2 बिस्वा एवं 644/242 1 बीघा 17 बिस्वा जमीन है। यानि की 86 हजार 284 वर्गफीट जमीन है, जिसके अधिकतम भाग पर बड़े-बड़े भवन बने हुए हैं। इस जमीन की मालकिन न्यु लूक की प्रिंसिपल लता कोठारी है। लता कोठारी ने इसे दिनांक 28.4.2014 को 2 करोड़ 67 लाख 35 हजार 776 रूपए में एक से व्यक्ति से खरीदी गई है। उक्त जमीन लता कोठारी की व्यक्तिगत जमीन है। इस व्यक्तिगत जमीन पर लगभग पांच करोड की नई बिल्डिंग बनी हुई है। यहां चौकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2014 में न्यू लुक की बैलेंस शीट में स्कूल के खाते से 3 करोड 29 लाख 85 हजार 449 रूपए मरम्मत पर खर्च करना बताया है। यह बैलेंस शीट की सत्यापित प्रति भी हमारे पास उपलब्ध है। इसे सहयोग कहें या सुनियोजित घोटाला कि प्रिंसिपल की लता कोठारी की व्यक्तिगत जमीन पर करोड़ों का भवन बनना और स्कूल के खाते में से करोड़ों की मरम्मत दिखाना क्योंकि मरम्मत पर लगभग 3 करोड 30 लाख खर्च करना अपने आप में संदेह पैदा करता है। इस तरह हजारों के वेतन से करोड़ों की जमीन और करोड़ों का निर्माण होना स्कूल को चूना लगाकर गबन एवं धोखाधडी के साथ आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है।

लता कोठारी ने एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल होते हुए करोड़़ों की संपत्ति कहां-कहां अर्जित की, जिसका रिकॉर्ड भी पाठकों के सामने प्रस्तुत है। दिनांक 23.7.2010 को ग्राम जानामेडी में 16000 स्क्वायर फीट प्लॉट 30 लाख 40 हजार में खरीदना बताया गया है। पाठक भी जानते हैं कि बाजार मूल्य और खरीदने का मूल्य कई गुना अंतर होता है। इसी तरह दिनांक 28.3.2013 को 60022 स्क्वायर फीट जमीन ग्राम जानामेड़ी में 16 लाख 86 हजार 160 रूपए में खरीदी गई। इसी तरह दिनांक 30.3.2016 को 8149 स्क्वायर फीट जमीन ग्राम जानामेड़ी में 22 लाख 81 हजार 720 रूपए में खरीदी गई। दिनांक 18.4.2013 को 2421 स्क्वायर फीट जमीन 7 लाख 45 हजार 927 रूपए में खरीदी गई। 29.4.2013 को 4751 स्क्वायर फीट जमीन 13 लाख 30 हजार 280 रूपए में। इसी क्रम में 14.5.2013 को 1500 स्क्वायर फीट जमीन 4 लाख 62 हजार। इसी तरह 15.5.2013 को 1500 स्क्वायर फीट 4 लाख 62 हजार। 14.6.2013 को 1500 स्क्वायर फीट 4 लाख 20 हजार। 17.6.2013 को 1500 स्क्वायर फीट 4 लाख 20 हजार। 21.6.2013 को 1500 स्क्वायर फीट 4 लाख 20 हजार। 25.6.2013 को 1500 स्क्वायर फीट 4 लाख 20 हजार। 3.7.2013 को 3000 स्क्वायर फीट 8 लाख 40 हजार। 3.10.2013 को 1800 स्क्वायर फीट 6 लाख 53 हजार 400 रूपए में खरीदी गई। 30.4.2015 को 6267 स्क्वायर फीट 22 लाख 56 हजार में खरीदी गई। तथा लगभग 5 बीघा भूमि पर 5 करोड का भवन बना हुआ है। इस तरह कई अन्य भी जमीनें खरीदी गई हैं।

अंदर की खबर समाचार पत्र के पास न्यु लूक सीनियर सैकण्डरी स्कूल लोधा, न्यू लूक स्कूल सोसायटी की वर्ष 1995 से लेकर 31 मार्च 2014 तक जो बैलेंस शीटें बड़ी मेहनत से हासिल की हैं उनका अध्ययन करने पर भी सोसायटी में भारी हेरफेर नजर आ रहा है! इन बैलेंस शीटों में कहीं पर भी लता कोठारी को बतौर प्रिंसिपल कोई एडवांस देना नहीं दिखाया गया है। जबकि लता कोठारी की जमीन पर न्यू लुक की बिल्ंिडग बनी हुई है। इसी तरह कई चौकाने वाले मामले बैलेंस शीट में नजर आ रहे हैं। जिसमें इसी संस्थान से जुड़ी स्कूलों से लेन-देन भी नजर आ रहा है।

हालांकि यह सब रिकॉर्ड पर है, परंतु इस तरह के लेन-देन कानूनन कितने सही हैं यह भी जांच का विषय है। इन बैलेंस शीटों में एनएलईएस सागवाड़ा, न्यू लुक गल्र्स कॉलेज, एनएलसीएस परतापुर से लेनदेन दर्शाया गया है। कभी इन बैलेंस शीटों में घाटा दिखा गया है तो कभी इन बैलेंस शीटों में सरप्लस फंड दिखाया गया है।

सब बैलेंस शीटों में खासियत यह है कि फीस के रूप में हुई करोड़ों की आय को बड़ी साफगोई से खर्चे दिखाकर करोड़ों रूपयों को खुर्द-बुर्द करने का प्रथम दृष्टया में मामला नजर आता है। न्यू लुक की बैलेंस शीटों को हमने इनके विशेषज्ञ को दिखाया तो वह भी खर्चों को देखकर चौंक गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बैंलेंस शीटों में दिखाए गए खर्चों के बिलों का अध्ययन किया जाए तो पूरा मामला दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। इन सारी गड़बडियों के चलते अगर प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच की जाती है तो बांसवाड़ा का सबसे बड़ा घोटाला उजागर होना तय है।
लता कोठारी के पास इतने करोड़ की संपत्ति कैसे अर्जित हो सकती है यह जांच तो अब आयकर विभाग को करनी है। लता कोठारी का प्रथम वेतन 9 हजार और वर्तमान वेतन 55 हजार मान लें इन 37 वर्षों में उन्होंने जो वेतन से आय अर्जित की है उसका लगभग प्रतिशत निकाला जाए तो खर्चों के बाद उनके पास 75 लाख के लगभग संपत्ति होनी चाहिए। जबकि उनके पास संपत्ति 10 गुना से भी अधिक है। यह दस्तावेज तो हमारे पास हैं और बेनामी संपत्ति कीतनी होगी यह भी जांच का विषय है।

कोठारी परिवार न्यु लुक स्कूल संस्थान को अगर इमानदारी से संचालित करता तो वर्तमान में बच्चों की जो फीस वह फीस आधी हो सकती है। परंतु पूरा कुनबा ही इसे अपनी लूट की दुकान बना बैठा है। संबंधित विभागों को तुरंत एक्शन लेकर संस्था पर प्रशासक नियुक्त कर पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।

इस खबर में पारदर्शिता रखने के उद्देश्य से अंदर की खबर ने न्यू की प्रिंसिपल लता कोठारी एवं प्रबंधक प्रदीप कोठारी दोनों को इस खबर से संबंधित प्रतिक्रिया हेतु कुछ प्रश्नों का एक वाटसअप कर दूरभाषा पर सूचित किया था जवाब देने हेतु पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन प्रदीप कोठारी ने संतुष्ट जवाब नहीं दिया। इससे स्पष्ट होता है कि दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली है।

लता कोठारी के कालेधन एवं बेनामी संपत्ति के लाइव सबूत!

बांसवाड़ा। न्यु लुक की प्रिसिंपल लता कोठारी द्वारा सरकारी महकमों की आंखों में धूल झोंकने के लिए कागजों में तो कालेधन को सफेद कर दिया गया। लेकिन अंदर की खबर की जांच टीम के आगे काले धन का खेल नहीं चला। अंदर की खबर समाचार पत्र लगातार स्कूलों के द्वारा ज्यादा फीस वसूल कर अभिभावकों का खून चूसने के खेल को लेकर सजग प्रहरी के नाते नजर रखे हुए थी। पिछले 4 सालों से लगातार स्कूलों के दस्तावेज एकत्रित करने में लगे हुए थे। 4 साल बाद स्कूलों से जुडे कई दस्तावेज जिसमें स्कूल की बेलेंस शीट, संस्था के कर्ताधर्ता द्वारा अर्जित संपत्ति से जुड़े दस्तावेज हमें मिले, जो चौकाने वाले हैं। न्यू लुक संस्थान को फीस के रूप में करोड़ों रूपए की आय होती है। जिसे खर्च बताकर हिसाब-किताब बराबर दिखा दिया जाता है। लेकिन कहते हैं कि चोर सबूत छोड़ देता है। इसी तरह न्यू लुक की बेलेंस शीट में वेतन रिपेयरिंग इत्यादि पर हद से ज्यादा खर्च के हिसाब मिले तो हमें संदेह लगा, हमने स्कूल से जुडे लोगों द्वारा इन वर्षों में खरीदी गई संपत्ति की जांच पड़ताल शुरू की तो यहां पर बड़ा घोटाला नजर आया, जिस न्यु लूक स्कूल में रामा उर्फ रामा पिता वागजी जो कि न्यु लूक स्कूल बस का ड्राइवर है एवं इसके पिता वागजी पिता मेगजी निवासी बारी डायलाब के नाम लता कोठारी द्वारा करोड़ों की जमीन खरीदने के प्रमाण हमको मिले हैं। यहां पर कुछ पाठक सोचते होंगे कि उक्त लोगों के नाम लता कोठारी द्वारा क्यों जमीन खरीदी गई यहां बताना जरूरी है कि आदिवासी की जमीन स्वर्ण व्यक्ति नहीं खरीद सकता है। इस लिए पहले आदिवासी के नाम खरीद कर उसका कन्वर्जन कराकर लता कोठारी ने उक्त गरीब लोगों से खरीदना बताया गया। यह भी बेनामी संपत्ति की श्रेणी में आता है।

इस पूरे खेल का खुलासा हम करते हैं कि स्कूल के रूपयों का गबन कैसे कालाधन बनाया गया। प्रति वर्ष फीस बढ़ाकर छात्रों अभिभावकों का खून चूसा जाता है। जबकि संस्था के पास अगर पर्याप्त राशि है तो फीस नहीं बढ़ाई जाती परंतु स्कूलों द्वारा आय-व्यय बराबर दिखाकर फीस बढ़ा दी जाती है। जबकि कानूनन ऐसा नहीं होना चाहिए। न्यू लुक की बेलेंस शीट में आय तो करोड़ों रूपए परंतु जो खर्चे कभी हुए ही नहीं उन्हें खर्च बताकर करोड़ों की जमीन उक्त गरीब लोगों के नाम खरीदना बताया गया। जो गैर कानूनी है। फिर कन्वर्जन में करोड़ों रूपए लगा वह भी ब्लेक मनी है। फिर लता कोठारी ने उक्त लोगों से रजिस्ट्री अपने नाम कराई। यानि की रामा एवं मेगजी को करोड़ों का भुगतान करना बताया गया। जबकि रामा को कभी करोड़ों का भुगतान हुआ ही नहीं। इस तरह फीस के रूप में लूटी हुई राशि का बेनामी एवं काला धन बनाया गया। यही नहीं रूकी लता कोठारी की लूट अपनी निजी जमीन पर लगभग पांच करोड़ रूपए का विशाल भवन बनाया हुआ है। इन सब बातों से प्रमाणित होता है कि स्कूल के रूपयों का बड़े पैमाने पर गबन कर करोड़ों का घोटाला किया गया है। यह सब अब जांच का विषय नहीं है। क्योंकि इन सब चीजों के लाइव सबूत के रूप में दस्तावेज अंदर की खबर के पास उपलब्ध है। अब तो प्रशासन एवं सरकार को सीधे कार्रवाई करनी है।

निस्काम सेवा संस्थान के पदाधिकारियों को एक साल की सजा

डूंगरपुर। निष्काम सेवा संस्थान खेरवाड़ा के विरूद्ध धनराशि का दुरूपयोग एवं धोखाधड़ी का मामला प्रमाणित होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट चंद्र प्रकाश सिंह ने संस्था के पदाधिकारियों को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के युरोपियन कमीशन संवद्र्धित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान के नियमों के एवं शर्तों के अनुसार गतिविधियों को संपादित नहीं कर राशि का दुरूपयोग कर धोखाधड़ी करने के मामले में निष्काम सेवा संस्थान खेरवाड़ा के सचिव एवं कोषाध्यक्ष को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अध्यक्ष वर्षा डामोर की मृत्यु हो जाने के कारण कार्रवाई ड्रोप की गई। पूरा मामला यह है कि निष्काम सेवा संस्थान को एक लाख 31 हजार रूपया चिकित्सा से संबंधित कार्यों हेतु आवंटित किया गया था। परंतु उक्त कार्य नहीं करने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय द्वारा मात्र डाक से भेजे गए परिवाद पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए बिछिवाड़ा थाने में मामला दर्ज कराया गया। मामले की जांच में पाया गया कि संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा राशि का दुरूपयोग एवं धोखाधडी प्रमाणित पाए जाने पर विद्वान न्यायाधीश द्वारा सजा सुनाई गई।